इंतज़ार सच्चे इश्क़ का
आज भी इंतज़ार है उस बारिश का
जो होगी सच्चे इश्क़ की
जो भिगो दे मेरी रूह को
और एहसास दे अपने होने का
जो मेरे टूटे दिल को जुड़ा दे
और मुझे यकीन दिला दे
कि जिन्दा है मोहब्बत आज भी
सिर्फ कहानियों में नहीं हकीकत में भी
कोई शक्स है यहां
जो चाहता है तुम्हें सिर्फ तुम्हारे लिए
जिसके लफ्ज़ों में सच्चाई होगी
और जिसके इश्क़ में वफाई होगी
ना उठे मेरी कलम दोबारा
लिखने को टूटे दिलों की दास्तान
और दर्द भरी शायरी
जो वजूद दे एक हसीन जिंदगी को
जिसे गुजारने में एक जिंदगी भी कम लगे